SP का बड़ा एक्शन, पुलिस अधीक्षक ने 75 पुलिस अधिकारियों के वेतन पर लगाई रोक, पुलिस महकमे में हड़कंप


बिहार के पूर्णियां में एसपी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 75 पुलिस अधिकारियों के वेतन पर रोक लगा दी है, इसके साथ ही उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अब भी सुधार नहीं होता है तो आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी, बता दें कि एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने केस के अनुसंधान में लापरवाही बरतने वाले अनुसंधानकर्ताओं पर बड़ी कार्रवाई की है।

जिले के कई थानों की पुलिस की कार्य शैली से लोग परेशान हैं। लगातार हो रही अपराध की घटना और उसकी अनुशंधान में देरी हो रही है। इसके लिए कई बार चेतावनी दी जा चुकी है। इसके बावजूद इन पुलिस अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा था। इसी वजह से इनके खिलाफ एक्शन लिया गया है। सैलरी रोकने का फरमान पुलिस अधीक्षक ने जारी किया है। उन्होंने बताया कि दर्ज होने वाले मामलों के निष्पादन में जिले के 75 पुलिस पदाधिकारियों को बार-बार चेतावनी दी जा रही थी। इनकी कार्य शैली से अनुसंधान पर असर पर रहा था। कई बार मामले के निष्पादन में शिथिलता बरती जा रही थी।

निलंबित हो सकते हैं लापरवाह अधिकारी
एसपी उपेन्द्र नाथ वर्मा ने एक साथ 75 पुलिस पदाधिकारियों के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। एसपी के आदेश के बाद इन सभी पुलिस पदाधिकारियों के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया गया है। वेतन रोकने के बाद भी सुधार नहीं हुआ तो और भी कड़े एक्शन लिए जाने के संकेत पुलिस अधीक्षक ने दिए हैं। लापरवाह अधिकारियों को निलंबित भी किया जा सकता है।

मरंगा थाने के आठ अधिकारियों पर कार्रवाई
एसपी ने जिन पुलिस पदाधिकारियों के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है, उसमें सबसे अधिक शहर के प्रमुख मंरगा थाने के हैं। यहां के आठ पुलिस पदाधिकारी, बड़हरा कोठी एवं टीकापट्टी तथा भवानीपुर के सात-सात पुलिस पदाधिकारी, मुफ्फसिल एवं अमौर थाना के छह-छह पुलिस पदाधिकारियों की सैलरी रोक दी गई है। उनके अलावा केनगर थाना के चार, कसबा थाना के तीन, सदर थाना के तीन, सहायक खजांची थाना के चार, रूपौली थाने के तीन, रौटा थाने के चार पुलिस पदाधिकारियों के वेतन पर रोक लगाई गयी है।

लंबे समय से लंबित हैं कई मामले
चंपानगर एवं श्रीनगर थाना के दो-दो पुलिस पदाधिकारियों के वेतन पर भी रोक लगाई गयी है। इन अनुसंधानकर्ताओं के पास कई मामले लंबे समय से लंबित है तथा निष्पादन के बाद भी इन सभी अनुसंधान कर्ता द्वारा आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित नहीं किया गया है।

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